Tuesday, 25 July 2017

Josh-e-Jazba Poetry Meet

Dateline 22 July 2017.  A monthly poetry meet, under the aegis of Josh-e-Jazba, was held at the Fedration Hall, Lokpuram , Thane (Maharashtra). Josh-e-Jazba is a subsidy of Vetran Citizens Forum based in Thane working towards the welfare of senior citizens. Poems of various genres were recited both in Hindi and Marathi by  Ms/Mr. Anil Agwekar, H P Singh, Preetam Gulrajani, Manju Gulrajani, Rukhmani Krishnan,Tribhawan Kaul, Deepa Patwardhan, Indira Das, B.J.Deshpande, Umesh Mishra, Bidu Bhushan, RadhaKrishan Molasi & Hema Pandy. The meet was ably conducted by Mr.Anil Agwekar.  Mrs. Indira Das's self written 'Joshe Jazba- Joshe Jazba' song was adopted as the anthem of the Group. Hearty congratulations to Mrs. Indira Das and the all members of the group. Few photographs/videos of the same are presented here. 

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Monday, 24 July 2017

प्यादा




प्यादा
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प्रदर्शनकारी शांति से प्रदर्शन कर रहे थे। अचानक बिन बुलाये मेहमान के समान कुछ नेता टाइप के लोग आये और उनको उकसाने लगे। प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने इस पर एतराज़ भी किया पर उनकी अनदेखी कर, एक नेता  ने माइक छीन कर लोगों की  भावनाओं को भड़का दिया। फिर क्या था।  गर्म तवे को परखने के लिए कुछ छींटे ही काफी होती हैं। प्रदर्शनकारी हिंसक हो उठे प्रशासन को सख्त हिदायत थी कि शक्ति का प्रयोग बिलकुल ना करे। चुनाव नज़दीक थे और वोटों पर असर पड़ने का डर था।  हेड कांस्टेबल हज़ारी लाल ने एक छोटे बच्चे को 'अब्बा अब्बा ' चिल्लाते हुए जो देखा तो उसे बचाने वह उग्र होती भीड़ में घुस गया। बच्चे को बचा कर वह उसे सुरक्षित स्थान पर ले आया पर फिर ना जाने क्यों चंद प्रदर्शकारी मानो एक योजना के तहत हज़ारी लाल को घेरने लगे। शीघ्र ही प्रदर्शनकारियों ने हेड कांस्टेबल हज़ारी लाल को घेर कर मारना आरंभ कर दिया। एक बार हज़ारी लाल ने अपनी पिस्तौल को निकला भी पर फिर उसने वापस होल्डर में रख दिया। अधमरी हालत में उसे  राज्य  के अस्पताल ले जाया गया। पत्रकारों का जमावड़ा एक सनसनीखेज समाचार हेतु  अस्पताल पहुँच गया।
पत्रकारों में से एक ने हज़ारी लाल से पूछा I "हज़ारी जी, सबों ने देखा कि आपने अपनी जान को खतरे में डाल कर बच्चे को कुचलने से बचाया। आपके पास एक पिस्तौल थी फिर आपने  प्रदर्शनकारियों को डराने या मारने  के लिए गोली क्यों नहीं चलायी ?
"भीड़ जब बेकाबू हो जाये तो पिस्तौल के छह गोली भी कम पड़ जाती हैं। निर्दोष उकसाये प्रदर्शनकारी चंद उग्रवादियों के उकसावे में आ कर मेरी पिस्तौल की भेंट चढ़ जाते। मैं तो इस पूरे तंत्र में एक अदना प्यादा हूँ जिसको इस्तेमाल कर हवा का रुख परखा जाता है। आत्मरक्षा में मैं गोली चला सकता था। कुछ प्रदर्शनकारी मारे भी जाते। मैं बच भी जाता तो भी राजनैतिक कारणों से  प्रशासन के पास, मुझे निलंबित और बर्खास्त करने के सिवाय कोई और चारा नहीं होता। किसी को तो बलि का बकरा बनना ही होता है।' हज़ारी लाल ने अपनी कमजोर होती आवाज़ में कहा। 
"आप मर भी तो सकते थे ", एक पत्रकार ने कहा। 
एक क्षीण से मुस्कान हज़ारी लाल के होंठों तक आयी। “बच्चा बच गया, यह कोई नहीं देखता। मेरी गोली से जो मारे जाते तो तलहका मच जाता। ड्यूटी पर किया गया आत्मरक्षा का प्रयास एक जानी मानी साजिश मानी जाती। असहिष्णुता का ढोल पीटने वाले कैंडल मार्च निकालते। विरोधी, सरकार का जीना हराम कर देते। सरकार मारे गए लोगों के परिवार को लाखों का मुआवज़ा क्षतिपूर्ति के लिए देती।“ हज़ारी लाल हांपने लगा। “और। ..और।  मेरे ऊपर एक इन्क्वारी समिति बिठा दी जाती। मेरी पेंशन रोक ली जाती। मेरा परिवार सड़क पर आ जाता। जय हिन्द। ... जय भारत। ... जय हिंदुस्तान। ......  हेड कांस्टेबल हज़ारी लाल की गर्दन लटक गयी थी।
जिनको इस हिंसक प्रदर्शन से बहुत कुछ उम्मीदें थी उन पर पानी पड़ गया था। होने वाले चुनाव में आशातीत फसल नहीं कटने की सम्भावना क्षीण हो गयी थी। प्यादे ने हवा का रुख ही मोड़ दिया था।
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सर्वाधिकार सुरक्षित/त्रिभवन कौल
Image curtsy Google.com

Sunday, 23 July 2017

An article in Tanima Magazine July 2017



An article on your friend published in Tanima Magazine from Udaipur(Rajasthan)
उदयपुर से तनिमा मासिक पत्रिका जुलाई २०१७ में आपके मित्र पर प्रकाशित साहित्यकार -कवि श्री Suresh Pal Verma Jasala जी का एक लेख। शुक्रिया Shakuntala Sarupariyaजी । हार्दिक आभार आपका। _/\_ सूचना देने के लिए हार्दिक धन्यवाद आपका Shakuntala Tanwar जी _/\_

Wednesday, 19 July 2017

तीन दोहे (Teen Dohe)



कश्मीरीयत ढोंग है, जिसे इसका भान
तजी लोकाचार गया, रहा वह इन्सान। I

Kashmeeriat dong hai, jise na iska bhan
Taji lokachaar gaya, raha na wh insaan.

'' '' '' कहत पाकी मरे, कशीर न मिलिए कोय 
प्रारब्ध ऐसा बने , 'पोकय ' हाथन धोय। 

K K K kahat Paaki mare, Kasheer na miliye koy
Prarbd aisa na bne, POKai haathn dhoy .

बहिष्कार कर चीन का , पाक देय उकसाय
चाह ना युद्ध की करौ , जे थोपे लड़ जाय।

Bahishkaar kar cheen kaa , PAK dey uksaay
Chah naa yuddh kee karau, jot hope ld jay.
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सर्वाधिकार सुरक्षित /त्रिभवन कौल

Tuesday, 18 July 2017

वर्ण पिरामिड (53-54)


'वर्ण पिरामिड' शीर्षक = छाया / छाँव / परछाई


माँ
छाँव 
ममता
हिमालय  
सुखद प्रीति 
नींव का पत्थर 
सुख की अनुभूति। 
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थी
क्षुधा 
कन्हैया  
चंदा मामा 
यशोदा माई 
कृष्ण भटकायी 
थाल में परछाई। 
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